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नाथ मैं थारो जी थारो

Nath Main Tharo Ji Tharo

📅 Dec 2025
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नाथ मैं थारो जी थारो। चोखो, बुरो, कुटिल अरु कामी, जो कुछ हूँ सो थारो॥ बिगड्यो हूँ तो थाँरो बिगड्यो, थे ही मनै सुधारो। सुधर्‌यो तो प्रभु सुधर्‌यो थाँरो, थाँ सूँ कदे न न्यारो॥ बुरो, बुरो, मैं भोत बुरो हूँ, आखर टाबर थाँरो। बुरो कुहाकर मैं रह जास्यूँ, नाँव बिगड़सी थाँरो॥ थाँरो हूँ, थाँरो ही बाजूँ, रहस्यूँ थाँरो, थाँरो!! आँगलियाँ नुँहँ परै न होवै, या तो आप बिचारो॥ मेरी बात जाय तो जा‌ओ, सोच नहीं कछु हाँरो। मेरे बड़ो सोच यों लाग्यो बिरद लाजसी थाँरो॥

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